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प्रॉपर्टी खरीदने से पहले अपने पास तैयार रखें यह डॉक्यूमेंट, कभी नहीं होगा नुकसान

Property Knowledge: अगर आप भी कोई प्रॉपर्टी खरीदने का मन बना रहे है तो यह खबर आपके लिए है। प्रॉपर्टी खरीदने से पहले आपको अपने पास खबर में बताए सभी डॉक्यूमेंट तैयर रखने चाहिए। ऐसा करने पर जमीन या प्रॉपर्टी के सौदे में आपके नुकसान की गुंजाइश बिल्कुल न के बराबर हो जाती है।  

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प्रॉपर्टी खरीदने से पहले अपने पास तैयार रखें यह डॉक्यूमेंट, कभी नहीं होगा नुकसान 

Agro Haryana, Digital Desk- नई दिल्ली : प्रॉपर्टी अपने नाम पर खरीद रहे हैं या कंपनी अथवा फर्म के नाम पर, कुछ ऐसे डॉक्‍यूमेंट होते है, जिसे तैयार रखने से आपको किसी भी तरह की मुश्किल का सामना नहीं करना पड़ेगा. 

सौदा भी जल्‍दी होगा और नुकसान की कोई गुंजाइश भी नहीं रहेगी. संपत्ति खरीदते वक्त उसके खरीदार को कौन से कागज तैयार रखने चाहिए जिससे कि अंतिम समय पर उसे किसी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़े. 

आप चाहे पार्टनर के साथ प्रॉपर्टी खरीद रहे हों या फिर कोई एनआरआई संपत्ति खरीदना चाहता हो, इन सभी को कुछ डॉक्‍यूमेंट की हमेशा जरूरत होती है. संपत्ति मामलों के जानकार और प्रॉपर्टी सलाहकार फर्म होमेंट्स के फाउंडर प्रदीप मिश्रा ने कुछ जरूरी डॉक्‍यूमेंट की लिस्‍ट तैयार की है.

बहुत महत्वपूर्ण है इंडिविजुअल ओनरशिप

इंडिविजुअल ओनरशिप का मतलब है कि कोई अकेला व्यक्ति जब कोई नवनिर्मित या किसी पूर्व स्वामी से कोई संपत्ति खरीदता है तो उस वक्त उसे पैन कार्ड यानी परमानेंट अकाउंट नंबर के साथ ही भारत सरकार की तरफ से जारी किया गया कोई व्यक्तिगत पहचान पत्र देना होता है. 

इस पहचान पत्र के तौर पर आधार कार्ड, वोटर कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या फिर भारत सरकार की तरफ से जारी किया गया कोई अन्य वैध पहचान पत्र प्रस्तुत किया जा सकता है. 

संपत्ति की खरीदारी के लिए भुगतान की जाने वाली रकम के कुछ हिस्से बैंकिंग ड्राफ्ट, बैंकर्स चेक, बैंक अकाउंट से ट्रांसफर जैसे माध्यमों से की जा सकती है.

जब कंपनी के नाम खरीदें प्रॉपर्टी

व्यक्तिगत तौर के अलावा कंपनियों के नाम पर भी संपत्ति की रजिस्ट्री करवाई जाती है और ​ऐसी स्थिति में उस संपत्ति का हक उस कंपनी के नाम पर होता है. 

जब कोई संपत्ति किसी कंपनी के नाम पर खरीदी जाती है तो उस स्थिति में कंपनी के स्वामी को कंपनी के पैन कार्ड, कंपनी के मैमोरेंडम ऐंड आर्टिकल, कंपनी के सिन यानी कॉरपोरेट आइडेंटिटी नंबर, बोर्ड रेजोल्यूशन, कंपनी द्वारा तय अधिकारी साइनिंग अथॉरिटी यानी कंपनी की ओर से उसकी खरीद के लिए अधिकृत व्यक्ति, अधिकृत व्यक्ति की व्यक्तिगत पहचान संबंधी कागज के साथ ही कंपनी का जीएसटी नंबर भी प्रस्तुत करना होता है. इसमें थर्ड पार्टी पेमेंट की अनुमति नहीं दी जाती है.

एनआरआईज के लिए अलग नियम

एनआरआई यानी भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों को स्वदेश में संपत्ति खरीदने का पूरा अधिकार है. साथ ही उन्हें भारत के किसी विभाग से किसी तरह की कोई विशेष अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती. 

यही नहीं भारतीय मूल के विदेशी भारत में न सिर्फ आवासीय बल्कि वाणिज्यिक यानी व्यावसायिक या कॉमर्शियल इस्तेमाल की संपत्ति खरीदने के भी हकदार हैं, किन्तु वह कृषि योग्य भूमि, कोई बागान अथवा फार्म हाउस नहीं खरीद सकते हैं. 

एनआरआईज को यदि कोई आवासीय या फिर कॉमर्शियल संपत्ति खरीदनी हो तो सामान्य व्यक्ति के लिए तय गए दस्तावेजों जैसे व्यक्तिगत पहचान पत्र और पैन कार्ड के साथ ही उन्हें पासपोर्ट रूपी दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य है. एनआरआई किसी भारतीय निवासी जो भारत में ही रह रहा हो उसके साथ भी संयुक्त रूप से संपत्ति खरीद सकता है.

पार्टनरशिप फर्म को भी है संपत्ति लेने का अधिकार 

पार्टनरशिप फर्म के लिए भी ज्यादातर कागजात व्यक्तिगत तौर पर ली जाने वाली संपत्ति जैसे ही हैं. बस इस रूप में खरीदार को पार्टनशिप फर्म की पार्टनरशिप डीड के साथ ऑथराइजेशन लेटर की प्रति भी प्रस्तुत करनी होती है. 

पार्टनरशिप फर्म को अपने पैन कार्ड नंबर के साथ जीएसटी नंबर भी पेश करना होता है. यहां एक बार फिर उल्लेख कर दूं कि इस मालिकाना हक के रूप में ली जाने वाली संपत्ति में भी थर्ड पार्टी पेमेंट की कोई गुंजाइश नहीं होती है.

 
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