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Income Tax Regime: न्यू और ओल्ड टैक्स रिजीम में होता है ये अंतर, इस तरह कर सकते है नए को पुराने टैक्स रिजीम पर ट्रांसफर

How To Switch Tax Regime: मार्च का महीना टैक्सपेयर्स के लिए बहुत जरूरी होता है। नए साल के बजट के ऐलान के बाद न्यू और ओल्ड दो टैक्स रीजिम को लेकर लोग अभी तक बहुत असमंजस में है। लेकिन क्या आप जानते हैं न्यू और ओल्ड टैक्स रिजीम में क्या अंतर होता है। चलिए इस खबर से जुड़ी जानकारी को जानने के लिए इस आर्टीकल के अंत तक हमारे साथ बने रहे-
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न्यू और ओल्ड टैक्स रिजीम में होता है ये अंतर
Agro Haryana, Digital Desk -नई दिल्ली: पिछले साल बजट में सरकार ने नई कर व्यवस्था का ऐलान किया था। इस टैक्स रिजीम (tax regime) के बाद अक्सर लोग काफी कंफ्यूज हो गए हैं कि इन दोनों में से टैक्सपेयर्स के लिए कौन-सी बेस्ट है। 

हर टैक्सपेयर्स को मार्च से पहले टैक्स रिजीम सेलेक्ट कर लेना है। अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो ऑटोमैटिक वह न्यू टैक्स रिजीम में सेलेक्ट हो जाएंगे। अगर आपने भी अभी तक टैक्स रिजीम सेलेक्ट नहीं की है और कंपनी ने टीडीएस (TDS) काट लिया है तो आप घबराएं नहीं।

न्यू टैक्स रिजीम टैक्स स्लैब

-नई टैक्स स्लैब में 2.5 लाख रुपये के सालाना इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगता है। 

-अगर 2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक की एनुअल सैलरी होती है तब 5 फीसदी टैक्स लगता है।

-5 लाख से 7.5 लाख रुपये तक की सालाना आय पर 10 फीसदी का टैक्स लगता है।

-इसी प्रकार 7.5 लाख से 10 लाख रुपये के एनुअल इनकम पर 15 फीसदी का कर लगाया जाता है।

-अगर टैक्सपेयर्स सालाना 10 लाख से 12.5 लाख रुपये तक कमाता है तब उसे 20 फीसदी के हिसाब से टैक्स देना होता है।

-जो करदाता 12.5 लाख से 15 लाख रुपये तक का सालाना इनकम कमाते हैं तो उन्हें 25 फीसदी के हिसाब से टैक्स चुकाना होता है।

-वहीं, जिन करदाता की सालाना इनकम 15 लाख रुपये से ज्यादा है उन्हें 30 फीसदी के हिसाब से टैक्स देना होता है।

पुराना टैक्स रिजीम का टैक्स स्लैब

-पुरानी कर व्यवस्था में 2.5 लाख रुपये तक की सालाना इनकम पर कोई टैक्स का भुगतान नहीं करना होता है।

-जिन टैक्सपेयर्स की सालाना इनकम 2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक है उन्हें 5% के हिसाब से टैक्स चुकाना होगा।

-वहीं, अगर एनुअल सैलरी 5 लाख से 10 लाख रुपये तक है तो 20फीसदी के हिसाब से टैक्स देना होगा।

-अगर 10 लाख रुपये से ज्यादा की सालाना आय है तब 30 प्रतिशत टैक्स लगाया जाएगा।

यदि टैक्स छूट (Tax Deduction) की बात करें तो इन दोनों टैक्स रिजीम में टैक्स छूट का पूरा लाभ उठाया जा सकता है। न्यू टैक्स रिजीम में आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत को छूट नहीं मिलती है। 

हालांकि टैक्सपेयर्स मानक छूट (Standard Deduction) के तहत 50,000 तक का टैक्स डिडक्शन ले सकते हैं। वहीं, पुरानी कर व्यवस्था में आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत टैक्स छूट दी जाती है। 

इसमें 1.50 लाख रुपये तक का टैक्स बेनिफिट का लाभ उठाया जा सकता है। किस टैक्स रिजीम ( Tax Regime) को सेलेक्ट करने के बाद हम ज्यादा टैक्स बेनिफिट का लाभ उठा सकते हैं। 

यदि आपने भी अभी तक टैक्स रिजीम सेलेक्ट नहीं की है और कंपनी ने टीडीएस (TDS) काट लिया है तो आप घबराएं नहीं। भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2023 में इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव किया था। 

इसके अलावा उन्होंने न्यू टैक्स रिजीम की भी घोषणा की थी। इसमें अब 3 लाख रुपये तक की इनकम को टैक्स फ्री कर दिया गया है। वहीं टैक्स रीबेट की सीमा को 5 लाख रुपये कर दिया गया है।

ऐसे में अगर आपने गलती से या फिर सोच-समझकर भी न्यू टैक्स रिजीम (new tax regime) सेलेक्ट किया है और अब आप पुराने टैक्स रिजीम में वापस जाना चाहते हैं तो क्या आप आसानी से इसे शिफ्ट कर सकते हैं।

जान लें क्या है डिफॉल्ट टैक्स रिजीम

इस वित्त वर्ष 2023-24 में डिफॉल्ट टैक्स रिजीम (default tax regime) न्यू टैक्स रीजीम बन गया है। ऐसे में अगर किसी टैक्सपेयर्स ने 1 अप्रैल 2023 में ओल्ड टैक्स रिजीम को सेलेक्ट किया है तो भी कंपनी डिफॉल्ट टैक्स रिजीम यानी न्यू टैक्स रिजीम के तहत टीडीएस काट लिया होगा।

जानिए क्या बदल सकते हैं टैक्स रीजीम?

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने अप्रैल 2023 में टैक्स रीजीम से संबंधित एक सर्कुलर जारी किया था। इस सर्कुलर में उन्होंने टैक्स रिजीम को शिफ्ट या बदलने जैसा कोई जानकारी नहीं दी है। इसका मतलब है कि इस पर अभी कोई स्पष्टता नहीं है कि करदाता टैक्स रिजीम को बदल सकता है या नहीं।

हालांकि, कई एक्सपर्ट के मुताबिक, अगर कंपनी करदाता को टैक्स रिजीम चेंज करने का ऑप्शन (Option to change tax regime)  देती है तब करदाता इसे बदल या शिफ्ट कर सकता है। अगर कंपनी द्वारा यह सुविधा नहीं दी जाती है तब इसका कोई इलाज नहीं है।

ITR भरते समय चुन सकते हैं टैक्स रीजीम

टैरक्स एक्सपर्ट के मुताबिक करदाता आईटीआर फाइल (ITR File) करते समय टैक्स रिजीम का सेलेक्शन कर सकते हैं। करदाता अपने हिसाब से कोई भी टैक्स रिजीम सेलेक्ट कर सकते हैं।

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