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Property Investment : प्रोपर्टी में निवेश करने से पहले जान लें पूरा गणित, वरना डूब जाएगा सारा पैसा

financial Investment : आजकल सभी लोग प्रोपर्टी में निवेश करना पसंद करते है क्योंकि निवेश करने से लोगों को काफी फायदा मिल रहा है। मौजूदा समय में प्रोपर्टी के रेट आसमान की ऊचाईंयों को छू रहे है। अगर आप भी प्रोपर्टी मे निवेश करने का सोच रहे है तो पहले अच्छे से पूरा गणिच समझ लें नहीं तो आपका सारा पैसा डूब जाएगा-
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प्रोपर्टी में निवेश करने से पहले जान लें पूरा गणित, वरना डूब जाएगा सारा पैसा
Agro Haryana, Digital Desk- नई दिल्ली :  वर्तमान समय में प्रोपर्टी खरीदना कोई आसान काम नही रह गया है। प्रोर्पी के रेट (property rates) आज आसमान छू रहे है। पुर भी अपने घर का सपना हर किसी का होता है। 

और लोग अपना घर खरीदते या बनाते समय काफी उत्साहित होते है। परिस्थितियों के अनुसार, जब भी संभव हो इस दिशा में विचार करके महिलाओं को प्लानिंग कर लेनी चाहिए। 

आप शादीशुदा हों, या करने वाली हों या फिर सिंगल हों, घर एक जरूरत है जिसे निवेश सलाहकार मानते हैं कि पूरा करने के लिए जरूरी प्रयत्न कर लेने (financial Investment) चाहिए।

आप प्रोपर्टी किस मकसद से खरीद रहे है ये भी बहुत मैटर करता है। अब सवाल उठता है कि भविष्य में अच्छे रिटर्न की कामना के साथ आप यदि प्रॉपर्टी खरीदने (property purchasing for investment) की सोचती हैं, तो यह एक बुरा फैसला हो सकता है।

यह कहना है टैक्स और इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट बलवंत जैन का। आइए इसके पीछे के गणित को समझें। हालांकि हम सलाह देंगे कि आखिरी फैसला आपको अपनी जरूरतों, हालातों , इच्छा तथा वित्तीय कारकों को ध्यान में रखकर ही करना सही रहेगा।

मान लेते है आप 1 करोड़ रुपये का मकान खरीदती हैं और इसे 5 साल बाद 20 करोड़ रुपये में बेच देती हैं। वहीं आप 1 शेयर खरीदती हैं 100 रुपये में और इसे भी 5 साल बाद बेच देती हैं, वह भी 500 रुपये में। 

ऐसे में मोटामोटी दोनों में बराबर का आरओआई देखने को मिलता है। यह रिटर्न (return on selling a house) दोनों ही में एक जैसा और लगाए गए पैसे से बेहद बड़ा अमाउंट है। 

रियल एस्टेट के कारोबार और निवेश से मिलने वाले इस रिटर्न (investment returns) को ही लार्ज वैल्यू बायस कहते हैं। बलवंत जैन इस पर जोर देते हुए कहते हैं कि आम निवेशक के लिए प्रॉपर्टी में निवेश के बदले मिलने वाला प्रॉफिट दरअसल लार्ज वैल्यू बायस का उदाहरण माना जा सकता है।

अब इस पर एक्सपर्ट जैन का कहना हैं कि निवेश में एफिशिएंसी (Efficiency in investment) के लिए सीएजीआर या सालाना ग्रोथ देखनी चाहिए। 

यह ग्रोथ रियल एस्टेट में नहीं दिखती है जबकि दिखता है लार्ज वैल्यू बायस जो मोटी रकम के एक साथ आने पर नजर आता है जबकि वह शुद्ध रिटर्न होता भी नहीं है। 

यदि आप निवेश के लिए रिहायशी प्रॉपर्टी खरीदती हैं तो इसके लिए आपको एक साथ लाखों या करोड़ के आसपास की रकम लगानी होती है। आम निवेशक होने के नाते यदि आप लोन पर रकम लेकर मकान में लगाती हैं तो भी 20 फीसदी तो डाउन पेमेंट के तौर पर आपको खुद की बचत लगानी होगी। 

किन्हीं एचएनआई (high net-worth individual- HNI) के लिए प्रॉपर्टी में निवेश एक अच्छा तरीका है लेकिन आम निवेशक के तौर पर आपके लिए नहीं है। एचएनआई यानी वे व्यक्तिगत निवेशक जिनकी नेट वर्थ वैल्यू पांच करोड़ रुपये से अधिक है। ये निवेशक अधिकतर व्यवसाय के मालिक, कॉरपोरेट अधिकारी, उद्यमी होते हैं।

बता दें कि निवेश के अन्य विकल्पों (Other investment options) के मुकाबले प्रॉपर्टी की लिक्विडिटी वैल्यू कम होती है। हो सकता है आपको आज पैसों की जरूरत हो लेकिन तब मकान न बिक पाए! 

कम से कम 6 महीने से लेकर 2 साल तक का समय एक अच्छा बायर ढूंढने में लग सकता है। जरूरत के वक्त हो सकता है कि यह आपको कम रिटर्न या घाटे पर बेचना पड़े। इस प्रकार के अंदेशों की अनदेखी नहीं की जा सकती।  

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इन सब के अलावा रेजिडेंशल प्रॉपर्टी की मेंटेनेस (Residential property maintenance) से लेकर प्रॉपर्टी की यदा कदा होने वाली टूट फूट की मरम्मत तक और केयर टेकर का खर्चा कुल मिलाकर मकान की ‘लागत’ को बढ़ा देते हैं।

साथ ही आप प्रॉपर्टी को पार्ट लिक्विडेट नहीं कर सकते। प्रॉपर्टी के एक हिस्से को बेचकर जरूरत पूरा करने का ऑप्शन एक पेचीदा सौदा हो सकता है। बलवंत जैन कहते हैं।

कि 5-6 फीसदी स्टैंप ड्यूटी, रिज्सट्रेशन चार्जेस, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन जैसे खर्चे भी इसके तहत आते हैं जबकि अन्य निवेश विकल्पों जैसे कि इक्विटीज में केवल 10 फीसदी ही टीडीएस कटता है।

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